बीसीसीआई ने मंगलवार 6 अक्टूबर को स्मृति मंधाना को भारतीय महिला टीम की full-time white-ball कप्तान नियुक्त किया। 2013 से टीम का हिस्सा रहीं मंधाना के सामने पहला बड़ा काम 16 अक्टूबर से शुरू होने वाली जिम्बाब्वे के खिलाफ छह मैचों की सीरीज है—रायपुर में तीन टी20आई और वडोदरा में तीन वनडे। यह नियुक्ति कप्तान बदलने से कहीं अधिक है: चयन और रणनीति, दोनों में भारत के अगले चक्र की दिशा अब यहीं से दिखाई देगी।
अनुभव मौजूद है, अब उसे पूरे चक्र में बदलना होगा
मंधाना के पास इस जिम्मेदारी के लिए सिर्फ़ स्टार बल्लेबाज़ का कद नहीं, पहले से मौजूद नेतृत्व का रिकॉर्ड भी है। बीसीसीआई के मुताबिक उन्होंने भारत को 18 टी20आई और चार वनडे में lead किया है। Olympics.com की रिपोर्ट के अनुसार उन 18 टी20आई में भारत ने 11 जीते, छह हारे और एक मैच बेनतीजा रहा। यह नमूना बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन इतना ज़रूर बताता है कि राष्ट्रीय कप्तानी उनके लिए बिल्कुल नया कमरा नहीं है।
उनका अंतरराष्ट्रीय अनुभव 2013 से लगातार बना है। इसका अर्थ यह है कि मंधाना उस टीम संस्कृति को भीतर से जानती हैं, जिसे अब उन्हें आगे बढ़ाना है; साथ ही वह पिछली कप्तान हरमनप्रीत कौर की विरासत को भी संभालेंगी। मंधाना ने नियुक्ति के बाद हरमनप्रीत के योगदान को विशेष रूप से याद किया। इसलिए इसे किसी पुराने दौर को मिटाने की कोशिश नहीं, काम करने के तरीके को आगे ले जाने का अवसर समझना अधिक उचित है।
रीसेट का मतलब हर खिलाड़ी को बदल देना नहीं होता। इसका मतलब है कि टीम यह साफ करे कि अगले white-ball चक्र में किस भूमिका के लिए किस खिलाड़ी पर भरोसा है, और वह भरोसा कितने मैचों तक कायम रहेगा। मंधाना की सबसे बड़ी परीक्षा इसी निरंतरता की होगी।
WPL की सफलता का असली उपयोग क्या होगा?
बीसीसीआई ने यह भी रेखांकित किया है कि मंधाना ने RCB को 2024 और 2026 में WPL खिताब जिताए। दो अलग सीजन में फ्रेंचाइज़ी टीम को शीर्ष तक ले जाना राष्ट्रीय क्रिकेट की गारंटी नहीं, पर नेतृत्व का उपयोगी प्रमाण है। वहां कप्तान को कम समय में भूमिकाएं तय कर संयोजन बदलना और अलग-अलग खिलाड़ियों को एक योजना में लाना पड़ता है।
अब यही अनुभव भारत के लिए व्यवस्थित रूप में चाहिए। WPL में किसी मैच का सही फैसला काफी हो सकता है; भारतीय टीम में मंधाना को चयन-चक्र, workload और format की अलग मांगें साथ रखनी होंगी। सफलता का पैमाना सिर्फ़ जीत का अंतर नहीं, यह भी होगा कि हर मैच के बाद अगली योजना अधिक स्पष्ट दिखे।
यहीं शफाली वर्मा की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। टी20आई टीम में वह vice-captain हैं, जबकि वनडे उपकप्तानी दीप्ति शर्मा को मिली है। यह एक दिलचस्प और व्यावहारिक संकेत है—दोनों formats के लिए एक ही नेतृत्व-ढांचा थोपने के बजाय चयनकर्ताओं ने अलग-अलग सहयोगी आवाज़ें रखी हैं। मंधाना को इसे व्यक्तिगत अधिकार की तरह नहीं, format-specific leadership group की तरह इस्तेमाल करना चाहिए।
जिम्बाब्वे सीरीज: छह मैच, दो अलग चयन-परीक्षाएं
बीसीसीआई के घोषित कार्यक्रम के अनुसार पूरी सीरीज इस तरह है:
| चरण | तारीख | समय (IST) | स्थान | नेतृत्व |
|---|---|---|---|---|
| पहला टी20आई | 16 अक्टूबर | शाम 7 बजे | रायपुर | स्मृति मंधाना (कप्तान), शफाली वर्मा (उपकप्तान) |
| दूसरा टी20आई | 18 अक्टूबर | शाम 7 बजे | रायपुर | स्मृति मंधाना (कप्तान), शफाली वर्मा (उपकप्तान) |
| तीसरा टी20आई | 20 अक्टूबर | शाम 7 बजे | रायपुर | स्मृति मंधाना (कप्तान), शफाली वर्मा (उपकप्तान) |
| पहला वनडे | 23 अक्टूबर | दोपहर 2 बजे | वडोदरा | स्मृति मंधाना (कप्तान), दीप्ति शर्मा (उपकप्तान) |
| दूसरा वनडे | 25 अक्टूबर | दोपहर 2 बजे | वडोदरा | स्मृति मंधाना (कप्तान), दीप्ति शर्मा (उपकप्तान) |
| तीसरा वनडे | 28 अक्टूबर | दोपहर 2 बजे | वडोदरा | स्मृति मंधाना (कप्तान), दीप्ति शर्मा (उपकप्तान) |
आईसीसी के fixture पेज पर भी यही तारीखें और स्थान दर्ज हैं। यानी यह दौरा एक ही opposition के खिलाफ दो format में टीम की सोच देखने का दुर्लभ मौका देगा। टी20आई में रायपुर की शाम के मैचों के दौरान पावरप्ले, तेज़ रन और गेंदबाज़ी के विकल्प केंद्र में होंगे। वनडे में वडोदरा के दिन के मैच भारत से पारी बनाने, स्ट्राइक घुमाने और 50 ओवर के लिए गेंदबाज़ी संसाधन बचाने की समझ मांगेंगे।
भारत के live scores और cricket hub पर इन छह मैचों के स्कोर और अपडेट देखे जा सकते हैं। मगर चयन के लिहाज़ से scorecard से आगे देखना होगा: किस बल्लेबाज़ को किस क्रम पर समय मिला, कौन-सा गेंदबाज़ नई गेंद और अंतिम ओवरों में इस्तेमाल हुआ, और दबाव के समय कप्तान ने किस विकल्प को प्राथमिकता दी।

युवा नामों को सिर्फ़ मौका नहीं, स्पष्ट भूमिका चाहिए
टी20आई टीम में Niki Prasad, G Kamalini, Nandni Sharma और Sree Charani जैसे युवा नाम हैं। वनडे टीम में भी Nandni Sharma और Sree Charani शामिल हैं। Richa Ghosh दोनों सूचियों में विकेटकीपर हैं; टी20आई में G Kamalini और वनडे में Yastika Bhatia भी विकेटकीपिंग विकल्प देते हैं। यह चयन एक साथ दो बातें कहता है: भारत के पास depth बनाने की इच्छा है, लेकिन अब उस depth को मैच-भूमिका में बदलना होगा।
युवा खिलाड़ी तभी विकसित होते हैं जब उन्हें केवल एक मैच में जगह भरने के लिए नहीं, किसी निश्चित काम के लिए उतारा जाए। मसलन, टीम प्रबंधन को पहले से तय करना होगा कि कौन पावरप्ले में आक्रामक विकल्प है, कौन मध्य ओवरों में पारी संभालेगा और कौन गेंद से matchup के आधार पर इस्तेमाल होगा। यहां “युवा” शब्द अपने-आप में रणनीति नहीं है। रणनीति तब बनेगी जब खिलाड़ी को लगातार दो या तीन मैचों में अपनी भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा।
मंधाना और शफाली की जोड़ी में भी यही स्पष्टता जरूरी है। दोनों का आक्रामक स्वभाव शुरुआती बढ़त दे सकता है, पर हर मैच में एक तरीका सफल नहीं होगा। कप्तान को विपक्षी गेंदबाज़ी, पिच और लक्ष्य के अनुसार powerplay की गति तय करनी होगी। शुरुआती विकेट गिरे तो मध्यक्रम की योजना और अच्छी शुरुआत मिले तो सुरक्षित तरीके से रन गति बढ़ाने का विकल्प पहले से होना चाहिए।
वनडे में नेतृत्व का दूसरा चेहरा
टी20आई में फैसले तेज़ दिखते हैं, जबकि वनडे कप्तानी धैर्य और क्रमिक दबाव का खेल है। वनडे टीम में दीप्ति शर्मा की उपकप्तानी इस format की जरूरतों से मेल खाती है: मंधाना के साथ एक अनुभवी क्रिकेटर, जो पारी और गेंदबाज़ी दोनों चरणों पर लगातार बातचीत कर सके। इसका फायदा तभी होगा जब मैदान पर roles पहले से तय हों, न कि संकट आने पर ही चर्चा शुरू हो।
भारत को वडोदरा में यह भी परखना चाहिए कि बल्लेबाज़ी कितनी गहराई तक जाती है और गेंदबाज़ी संयोजन 50 ओवर के लिए पर्याप्त विकल्प देता है। छह मैचों के बीच तीन दिन का अंतर है; इसलिए हर खिलाड़ी को लगातार खिलाना जरूरी नहीं, लेकिन बहुत अधिक बदलाव भी टीम की सीख तोड़ देंगे। यही संतुलन मंधाना को शुरुआती सप्ताह में साधना होगा।
इस सीरीज को भारत के news और results पेज पर भी follow किया जा सकेगा। नतीजे महत्वपूर्ण होंगे, पर इस दौरे का बेहतर रिपोर्ट कार्ड role clarity, bench strength और format के मुताबिक फैसलों में मिलेगा।
रीसेट का पैमाना जीत से बड़ा है
मंधाना का full-time कप्तान बनना स्वाभाविक उत्तराधिकार जैसा दिख सकता है, लेकिन यह आसान काम नहीं है। उनके पास 18 टी20आई और चार वनडे की कप्तानी का अनुभव, 2013 से अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव और RCB के दो WPL खिताब हैं। अब इन उपलब्धियों को भारत की चयन-नीति में बदलना होगा।
जिम्बाब्वे के खिलाफ छह मैच इसलिए उपयोगी हैं क्योंकि यहां नेतृत्व, युवाओं और format-planning को साथ परखा जा सकता है। यदि अगले मैच में भूमिकाएं फिर बदलती हैं, तो रीसेट अधूरा रहेगा। युवा खिलाड़ियों को स्पष्ट काम, deputies को format के हिसाब से जिम्मेदारी और मंधाना की रणनीति में तर्कसंगत बदलाव दिखे, तभी यह नियुक्ति नए दौर की शुरुआत होगी। भारत को अभी अंतिम निष्कर्ष नहीं, ऐसी दिशा चाहिए जिसे खिलाड़ी और चयनकर्ता छह मैचों में पढ़ सकें।
स्रोत: BCCI: Smriti Mandhana appointed captain of Indian Women’s Cricket Team · BCCI: India women's squads for T20I and ODI series against Zimbabwe announced · ICC: Women Fixtures · Olympics.com: Smriti Mandhana named India women’s cricket team captain
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Ajit Mohan Yadav
Rahul Jethalal

