6 अक्टूबर को पुडुचेरी में ऑस्ट्रेलिया A ने 274 रन बनाए और इंडिया A को 31.4 ओवर में 149 रन पर समेटकर 125 रन से हराया। 9 अक्टूबर के दूसरे अनऑफिशियल वनडे से पहले इस नतीजे का सबसे जरूरी सवाल यह नहीं है कि ऑस्ट्रेलिया A कितना अच्छा खेला, बल्कि यह है कि भारत ने 275 रन का पीछा शुरू होने से पहले ही क्यों गंवा दिया।

चार ओवर में मैच का रास्ता बदल गया

इंडिया A की पारी का स्कोरकार्ड जल्दी ही उस मैच की कहानी कहने लगा: 24 रन पर तीन विकेट। साई सुदर्शन 1, देवदत्त पडिक्कल 0 और प्रभसिमरन सिंह 17 रन बनाकर लौट गए। शुरुआती तीन विकेट चार ओवर के भीतर गिरना किसी भी 275 रन के लक्ष्य के खिलाफ सिर्फ खराब शुरुआत नहीं, पूरी रणनीति पर पड़ा दबाव है। उसके बाद हर नया बल्लेबाज यह जानकर आया कि एक और विकेट गिरा तो पारी संभालने का समय और कम हो जाएगा।

महली Beardman ने उस दबाव को अपनी गति और उछाल से बढ़ाया। ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज ने 140 किलोमीटर प्रति घंटे से ऊपर की रफ्तार के साथ पावरप्ले में निर्णायक स्पेल डाला और कुल 23 रन देकर चार विकेट लिए। सुदर्शन का गेंद को विकेटकीपर के हाथों में पहुंचाना, पडिक्कल का मिड-ऑफ की ओर हवा में शॉट लगाना और प्रभसिमरन का पॉइंट पर कट खेलते हुए पकड़ा जाना—तीनों आउट अलग दिखते हैं, पर शुरुआत में बल्लेबाजों के पास अपनी पारी की शर्तें तय करने का मौका नहीं आया।

यहां ऑस्ट्रेलिया A की गेंदबाजी को श्रेय देना जरूरी है, लेकिन उसे पूरी कहानी मान लेना आसान रास्ता होगा। तेज गेंदबाज ने सवाल पूछे; इंडिया A के शीर्ष क्रम ने हर सवाल का अलग और टिकाऊ जवाब नहीं दिया।

हार ऑस्ट्रेलिया A की जीत से बड़ी बात क्यों है

ऑस्ट्रेलिया A की पहली पारी भी बिना झटके के नहीं चली थी। उसने 30 रन पर तीन विकेट गंवाए, फिर 87 रन पर पांच विकेट हो गए। भारत के लिए यह वह स्थिति थी जिसमें 274 का स्कोर 220-230 के आसपास रोका जा सकता था। नाथन मैकस्वीनी और विल सदरलैंड ने 141 रन की साझेदारी कर मैच का रुख बदल दिया। मैकस्वीनी ने 123 और सदरलैंड ने 77 रन बनाए।

इस साझेदारी से दो बातें साफ होती हैं। पहली, पिच पर शुरुआती मदद थी, लेकिन वह पूरी पारी के लिए बल्लेबाजी असंभव नहीं बना रही थी। दूसरी, ऑस्ट्रेलिया A के मध्य क्रम ने संकट को भूमिका के हिसाब से संभाला—एक बल्लेबाज ने पारी को लंबा खींचा, दूसरे ने बाद में तेजी बढ़ाई। मैकस्वीनी ने 135 गेंदों पर 123 रन बनाए, जबकि सदरलैंड ने पहले धैर्य से साथ दिया और फिर आक्रमण चुना। भारत की पारी में ऐसा साझा ढांचा नहीं दिखा।

इसीलिए 125 रन की हार को केवल प्रतिद्वंद्वी की ताकत का परिणाम कहना चयन की समस्या को ढक देगा। इंडिया A में नामों की कमी नहीं थी: सुदर्शन, पडिक्कल, प्रभसिमरन, रुतुराज गायकवाड़ और रजत पाटीदार जैसे बल्लेबाज मौजूद थे। असली प्रश्न यह था कि किसे किस भूमिका में भेजा गया, किसे नई गेंद के सामने जोखिम नहीं लेना था और किसे शुरुआत को लंबा बनाना था। टीम में प्रतिभा थी; शुरुआती योजना पर्याप्त स्पष्ट नहीं दिखी।

पाटीदार की 53 रन वाली पारी ने क्या बचाया

रजत पाटीदार ने 51 गेंदों पर 53 रन बनाकर पारी को एक समय फिर से मुकाबले में लौटाया। रुतुराज गायकवाड़ के साथ उनकी 34 रन की साझेदारी के बाद, निशांत सिंधु ने उनका साथ दिया और पांचवें विकेट के लिए 47 रन जोड़े। सिंधु ने 31 रन बनाए। 16 गेंदों पर सिर्फ पांच रन से शुरू करने के बाद उन्होंने अगले छह ओवरों में तीन चौके और एक छक्का लगाकर गति लौटाने की कोशिश की।

यह साझेदारी इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि उसने दिखाया कि भारत के पास दबाव के बाद भी पारी को दोबारा बनाने की क्षमता है। पाटीदार ने खाली गेंदों को कम किया, सिंधु ने जरूरत पड़ने पर गति बढ़ाई। 58 रन पर चार विकेट के बाद 47 रन का जुड़ना बताता है कि लक्ष्य असंभव नहीं था। भारत को बस एक लंबी साझेदारी और चाहिए थी।

पिच पर गिरी गिल्लियां और तीन सफेद गेंदें, जल्दी-जल्दी गिरे विकेटों का प्रतीक दृश्य।

लेकिन इस वापसी की सीमा भी थी। सिंधु 31 पर गहरे कवर-पॉइंट पर शानदार कैच का शिकार हुए। पाटीदार ने 32वें ओवर में अपना अर्धशतक पूरा किया और अगली गेंद पर शॉर्ट गेंद के खिलाफ आउट हो गए। उनके जाने के बाद आखिरी चार विकेट केवल 11 रन के भीतर गिर गए। यानी मध्यक्रम ने आग बुझाने का काम किया, पर पारी को लक्ष्य तक ले जाने के लिए जरूरी समय और विकेट सुरक्षित नहीं रख सका।

चयन के लिए पहला सवाल: शुरुआत कौन करेगा

दूसरे मुकाबले से पहले टीम प्रबंधन के सामने सबसे सीधा सवाल ओपनिंग का है। यह किसी एक खिलाड़ी को दोष देने का मामला नहीं है। मुद्दा यह है कि शीर्ष चार में हर बल्लेबाज की प्राथमिक भूमिका पहले से तय हो। कौन नई गेंद को छोड़कर गेंदबाज को लंबा स्पेल करने पर मजबूर करेगा? कौन फील्डिंग प्रतिबंधों का फायदा उठाएगा? और अगर दो विकेट जल्दी गिरें तो अगला बल्लेबाज पारी बनाने आएगा या तुरंत रन गति बढ़ाने?

पहले मैच में भारत के शीर्ष तीन ने कुल 18 रन बनाए। यह आंकड़ा अपने आप में चयन का फैसला नहीं करता, लेकिन इससे शुरुआत की योजना पर सवाल जरूर बनता है। यदि किसी बल्लेबाज को ओपनिंग में खिलाया जा रहा है तो उसे उस जिम्मेदारी के मुताबिक लगातार अवसर, स्पष्ट शॉट-चयन और पावरप्ले की अलग योजना चाहिए। नामों को क्रम में रख देना भूमिका तय करना नहीं होता।

रुतुराज ने 30 गेंदों पर 15 रन बनाकर पाटीदार के साथ कुछ समय दिया, पर चौथे विकेट की 34 रन की साझेदारी तब आई जब नुकसान हो चुका था। इसलिए सवाल केवल यह नहीं होना चाहिए कि कौन अच्छा खिलाड़ी है। सवाल यह होना चाहिए कि 275 रन के पीछा में पहले 10 ओवरों के लिए भारत का बल्लेबाजी ढांचा क्या है।

दूसरा सवाल: कौन किस चरण का बल्लेबाज है

पाटीदार की 53 रन वाली पारी को अकेली स्थिरता कहना उचित है, लेकिन उनसे हर बार टूटे हुए शीर्ष क्रम की मरम्मत की उम्मीद नहीं की जा सकती। अगर वह चौथे या पांचवें नंबर पर आते हैं, तो उनकी भूमिका को नई गेंद के बाद पारी जमाने और फिर रन गति बढ़ाने के रूप में देखा जा सकता है। इसके विपरीत, ओपनरों से अलग तरह का धैर्य चाहिए—पहले गेंद की गति और उछाल को समझना, फिर फील्ड खुलने पर जोखिम बढ़ाना।

सिंधु की 31 रन की पारी ने भी एक उपयोगी विकल्प दिखाया। उन्होंने शुरुआत में रुककर खेला, फिर स्कोरिंग बढ़ाई। ऐसा बल्लेबाज पारी के बीच में पुल का काम कर सकता है, लेकिन तभी जब उसके आसपास विकेट और भूमिका दोनों स्थिर हों। 58 पर चार विकेट के बाद हर साझेदारी को मैच बचाने वाली साझेदारी बना देना विकास की सही प्रक्रिया नहीं है। खिलाड़ियों को यह पता होना चाहिए कि वे पारी की मरम्मत कर रहे हैं, गति बना रहे हैं या अंत तक बल्लेबाजी कर रहे हैं।

भारत को इस मैच के बाद केवल एक बदलाव की सूची नहीं, भूमिकाओं की सूची बनानी चाहिए। कौन पहला कठिन स्पेल खेलेगा, कौन जोखिम कम रखेगा और किस स्थिति में आक्रमण शुरू होगा—इन सवालों के जवाब प्लेइंग इलेवन से पहले तय होने चाहिए।

9 अक्टूबर से पहले उपयोगी सुधार

सबसे पहला सुधार शुरुआत को लंबा करना है। 24 रन पर तीन विकेट के बाद कोई भी रणनीति रक्षात्मक हो जाती है। इसलिए पहले चार ओवरों में विकेट बचाने की योजना, शॉट के साथ-साथ गेंद छोड़ने का अनुशासन और स्ट्राइक बदलने की कोशिश जरूरी होगी। इसका अर्थ यह नहीं कि भारत धीमा खेले; अर्थ यह है कि वह Beardman जैसी गति को अपने विकेटों से पुरस्कृत न करे।

दूसरा सुधार साझेदारियों की जिम्मेदारी बांटना है। मैकस्वीनी-सदरलैंड ने ऑस्ट्रेलिया A के लिए यही किया: एक ने पारी को आधार दिया, दूसरे ने सही समय पर दबाव वापस डाला। भारत को भी यह तय करना होगा कि पाटीदार, सिंधु या कोई अन्य बल्लेबाज किस परिस्थिति में एंकर की भूमिका निभाएगा और कौन उसके आसपास रन गति बढ़ाएगा।

तीसरा सुधार निचले क्रम को मौका देना है, न कि उससे चमत्कार की उम्मीद करना। आखिरी चार विकेट 11 रन के भीतर गिरना बताता है कि पाटीदार के आउट होते ही विकल्प सीमित हो गए। 275 के लक्ष्य में सातवें नंबर तक योगदान की योजना होनी चाहिए, ताकि एक विकेट के साथ पारी का पूरा ढांचा न टूटे।

इंडिया A को पुडुचेरी में हार मिली, पर 9 अक्टूबर से पहले उसके पास साफ संकेत भी है। ऑस्ट्रेलिया A की वापसी और Beardman का शुरुआती चार ओवरों का हमला भारत को सिखाता है कि जवाब नामों से नहीं, क्रम और भूमिका की स्पष्टता से देना होगा। यही इस हार का असली उपयोग है। पाठक आगे के मुकाबले के लाइव स्कोर देख सकते हैं और FairPlay के क्रिकेट हब पर बाकी कवरेज पढ़ सकते हैं।


स्रोत: ESPNcricinfo: McSweeney 123, Beardman four-for down India A · ESPN: McSweeney 123, Beardman four-for down India A

यह लेख FairPlay Editorial Desk ने AI की मदद से, ऊपर दिए गए प्रकाशित स्रोतों के आधार पर लिखा है। प्रकाशन से पहले FairPlay की संपादकीय टीम के अजीत मोहन यादव और राहुल जेठालाल ने इसकी समीक्षा की। किसी गलती की जानकारी देने के लिए हमारी संपादकीय नीति देखें।